आक्रोश

जंगलों के लिए आतंक सिद्ध हो रहा जेपीएल,पहले पेड़ काटे अब खोद रहे है जमीन

इस मामले में एसडीएम प्रवीण तिवारी ने कहा कलेक्टर से करेंगे चर्चा

ब्रह्मोस न्यूज रायगढ़। जंगलों के लिये आतंक बन चूके जेपीएल के कहर एक बार फिर नागरामुड़ा के जंगल चितकार कर उठे है। जिस पर कार्रवाई के नाम पर महज आज तलक जिले के अधिकारी मूकबाधिर बच्चों की तरह खामोशी सेेे तमाशबीन बने बैठे है जो इस मामले में कार्रवाई क्यो नही कर रहे है यह समझ से परे है। खास बात यह है कि इस मामले में पेशा कानून एक्ट का तो उल्लंधन हो ही रहा है। साथ ही इस मामले में कोर्ट ने भी अधिकारियों को जवाब तलब तक कर चूके है। इसके बाद भी कोई सुनवाई का नही होना विडंबना ही है। गौरतलब है कि एक बार फिर नागरामुडा तथा आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीणों ने इंसाफ की आस लगाये जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। जिन्होनें जिला प्रशासन को ज्ञापन सौपते हुए साफ साफ कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाये हम जंगल छोड़ कर नही जायेगें। उन्होनें बताया कि न तो ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित हुआ है और न ही किसी प्रकार से अनुमति लिया गया है फिर भी जिंदल के गुर्गे अवैध तरीके से पेड़ो की काटाई कर रहे है। जबकि इस मामले में सबसे अधिक चौकाने वाले तथ्य यह है कि वन विभाग के कर्मचारी कम जिंदलकर्मी अधिक रहते है जो पेड़ों की अवैध तरीके से कटाई कर है। ग्रामीणों ने बताया कि नागरामुडा के 10 से 12 एकड़ जंगल में हजारो पेड़ों को काटा जा चूका है जिसे ग्राम वासियों ने किसी तरह उन्हे ले जाने नही दिया। यही नही उन्होंने यह भी बताया कि वन वन विभाग कहती है कि हमने कोई आदेश नही दिया है। यही नहीं ग्रामीणों ने यही बताया कि ग्राम पंचायत सारसमाल के आश्रित ग्राम डोंगा महुआ तथा कोसम पाली एवं कोडकेल के अंतर्गत आने वाले जंगल को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चारागाह के लिए सामुदायिक वन अधिकार पट्टा दिया गया है जिसमें जिंदल कंपनी के द्वारा अवैध तरीके से जंगल की जमीन में खुदाई की जा रही है जिन्हें मना करने पर ग्रामीणों को मारा पीटा जा रहा है और धमकी भी दी जा रही है जबकि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्राम वासियों को पीएफ क्रमांक 795 रकबा 26.794 हेक्टर जमीन का सामुदायिक पट्टा दिया गया है।

हाई कोर्ट  ने भी मांगा है जवाब

ग्रामीणों ने  हाईकोर्ट बिलासपुर को याचिका दायर भी कर दिया है। जिसमें ग्रामीणों का कहना है कि दो पेशी हो जाने पर भी अभी तक शासन के द्वारा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि नागरामुडा गांव भारतीय संविधान के अनुसार पांचवी अनुसूची क्षेत्र है जहां पेसा कानून भी लागू है। बिना ग्राम सभा सहमति के शासन के द्वारा जंगलों की कटाई की अनुमति प्रदान कैसे कर दी गई है।

 वन भूमि को नहीं देने का प्रस्ताव पारित हो चुका है

इस विषय पर ग्राम सभा जांजगीर पंचायत जिसका आश्रित गांव नागरामुडा है। उस ग्राम सभा में 21 अक्टुबर 2018 को इस वन भूमि को नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। एवं आज दिनांक तक कोई भी सहमति प्रस्ताव नहीं दिया गया है। 

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