डर्टी राजनीति ने बिगाड़ दी पंडरीपानी की आबोहवा, चल रहा है नजूल जमीन पर बेजा कब्जा का खेल

एक पंच के डर्टी राजनीति ने बिगड़ दी गांव की आबो हवा
ब्रह्मोस न्यूज रायगढ़। जिस तरीके से ग्राम पंचायतों में भी जोड़-तोड़ राजनीति होती है वह किसी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति से कम नहीं होती परंतु गांव के जिस विकास के लिए राजनीति की जानी चाहिए वह अगर स्वार्थ पूर्ति के लिए हो तो उस गांव का विनाश तय होता है। ऐसे ही मामलो में ग्राम पंचायत पंडरीपानी के एक खनाबदोष पंच के स्वार्थ पूर्ति की राजनीति ने गांव को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है। यही वजह है कि ग्राम पंचायत पंडरीपानी में आज नजूल जमीनों पर अवैध बेजा कब्जा का ऐसा खेल चल रहा है जिसकी प्रशासनिक जांच हो जाय तो कई सफेदपोश लोगो के भेद खुल जायेंगे।
गौरतलब है कि दो साल पूर्व ग्राम पंचायत पंडरीपानी पूर्व के महिला सरपंच को वहां के पंचों ने सिर्फ इसलिए अविश्वास प्रस्ताव पेश कर हटा दिया कि वह ग्राम सभा में कभी कभार उपस्थित नहीं हो पाती थी।इसे वहां के पंचों ने अपना अधार बना लिया और रणनीति के तहत झूठा प्रचार प्रसार कर सरपंच के खिलाफ वोटिंग करा दी और इसके बाद शुरू हुआ वहां नजूल जमीनों पर बेजा कब्जा करवाने का खेल। इसमे भू माफिया बनाम एक पंच के इशारे पर गांव की नजूल भूमियो पर कब्जा का सिलसिला शुरू हो गया । खास बात यह है कि गांव का उक्त पंच खुद कई डिसमिल नजूल भूमि पर कब्जा जमाए बैठा है।
बेख़ौफ़ चल रहा है बेजा कब्जा का खेल
खास बात यह है कि हाल के दिनों में भी भू माफियाओ ने पंडरीपानी के महालक्ष्मी मंदिर के सामने सड़क की नजूल सरकारी जमीन तक को नही छोड़ा और खसरा नम्बर 87 / 1 के राजस्व भूमि पर उगे पेड़ो की कटाई कर जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और उसमे फिलहाल नीव की खुदाई की जा रही है। जिस पर न तो सेटिंग बाज ग्राम पंचायत के जन प्रतिनिधियों की नजर जा रही है और न ही जिला प्रशासन के अधिकारी संज्ञान ले रहे है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिला प्रशासन जिस राजस्व निरीक्षक के रूप में हल्का पटवारी और सचिव को नियुक्त किया है। वह भी आंखे मूंदे बैठे है जिनके द्वारा कार्यवाही नही किया जाना कुछ और ही इशारा कर रहे है । सम्भवतः ग्रामीण राजनीति के इस इस खेल में शामिल होने की बात से इंकार नही किया जा सकता। इसी तरह 38 नंबर पटवारी हल्का के 87/1 में ही एक मोबाइल कारोबारी के द्वारा भी बेख़ौफ़ होकर नजूल जमीन और कब्जा कर किया गया है। इसके अलावा थोड़ा आगे खसरा नम्बर 36 / 1 के एक हिस्से में एक भू माफिया की शह पर खुलेआम कब्जा किया जा रहा है।
आंखे मूंदे बैठे है प्रशासनिक कारिंदे
ग्राम पंचायत के इस पूरी राजनीति में गांव के हल्का पटवारी और सचिव तमाशबीन में नजर आते है। जबकि ग्राम पंचायत के सचिव को जिला प्रशासन इसलिए नियुक्त किया जाता है कि वह ग्राम पंचायतों में होने वाले गतिविधियों और ग्राम पंचायतों के प्रस्तावों एवं सही गलत पर नजर रख सकें ताकि शासकीय राशियों का दुरुपयोग ना हो सके और ग्राम सभा में होने वाले प्रस्ताव को नियम कानून के दायरे में रहकर उसे पारित कराए परंतु ग्राम पंचायत पंडरीपानी में नजूल जमीनो पर बेजा कब्जा से लेकर गांव के अन्य गतिविधियां बेखोफ चल रहा है ।




