नागरामुड़ा जंगल कटाई के विरोध में 37 दिन से जंगल में ही डटे हुए हैं ग्रामीण

नागरामुड़ा के ग्रामीणों ने लिया संकल्प किसी भी हाल में नहीं काटने देंगे गांव के जंगल
ब्रह्मोस न्यूज रायगढ़। नागरामुडा गांव के जंगल की कटाई को लेकर जहां गांव के ग्रामीणों ने हाल ही में वन विभाग के खिलाफ जिला प्रशासन से शिकायत करते हुए अवैधानिक पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की थी वही शासन प्रशासन के द्वारा कोई कार्यवाई नही किये जाने पर अब खुद पेड़ो की रक्षा करने जंगल पहुँच गये है और इसके विरोध ने पिछले 37 दिनों से आंदोलन करते हुए जंगल मे ही डटे हए है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में ही नागरा मुडा में जंगल की कटाई को लेकर कलेक्टर से गुहार लगाई थी और इसे अवैध करार दिया था इसके विरोध में ग्रामीण जंगल ही पहुंच गए। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन का कहना है कि स्वीकृति पश्चात ही जंगल कटाई शुरू की गई है।परंतु ग्रामीणों का आरोप है कि यह क्षेत्र भारत के संविधान के मुताबिक पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है।और यहां बिना ग्राम सभा सहमति के जंगल कटाई की स्वीकृति मिल गई और जंगल कटाई शुरू कर दी गई।ग्रामीणों ने कहा अतिरिक्त भूमि के नाम से 2007 में पंचायत प्रस्ताव दिया गया था परंतु अभी तक वन भूमि के लिए ग्राम सभा का प्रस्ताव नहीं दिया गया है।ग्राम सभा हुआ उसमें इसके विरोध में प्रस्ताव बना है।फिर भी शासन–प्रशासन के द्वारा गलत तरीके से स्वीकृति दी गई है।इसके विरोध में ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि शासन प्रशासन के द्वारा यहां पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन की कोई भी तैयारी नहीं की गई है। विस्थापित होने से गांव के लगभग 50 परिवार बेघर हो जाएंगे।और इसी बात का डर ग्रामीणों को सता रहा है।पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासन प्रशासन के द्वारा गैर कानूनी और गैर संवैधानिक तरीके से जंगल की कटाई शुरू कर दी गई है। जिसके विरोध में ग्रामीण लगातार 37 दिन तक आंदोलन करते हुए दिन–दिनभर जंगल में रहकर जंगल की रखवाली कर रहे हैं।




