न कोई क्राइटेरिया न ही कोई मापदंड, टिमर लगा में सिर चढ़ कर बोल रहा है प्रदूषण का कहर

ब्रह्मोस न्यूज रायगढ़। न, हीं कोई नियम कानून है और न ,ही कोई क्राइटेरिया । हर तरफ प्रदूषण और फ्लाई ऐश का कहर टीमरलगा में सिर चढ़कर बोल रहा है।जहां हर 10 कदम में अवैध तरीके से डंपिंग कर पूरे क्षेत्र को प्रदूषण कर दिया गया है। जिस पर ना तो अधिकारियों को नजर जा रही है और नहीं कोई मापदंड तय किया जा रहे हैं। ऐसे में टीमरलगा क्षेत्र अवैध डंपिंग यार्ड एवं प्रदूषण का दलदल बनकर रह गया है।

गौरतलाब है कि क्रेशर खदान के नाम पर चर्चित सारंगढ़ बिलागढ़ जिले के टीमर लगा क्षेत्र अवैध फ्लाई एस डंपिंग यार्ड का अड्डा बन चुका है । जिस पर ना तो अधिकारियों की नजर जा रही है और ना ही जिला प्रशासन गंभीर है। जबकि टीमरलगा के कई क्रेशर खदान ऐसे हैं जहां शासन प्रशासन के मापदंडों की खुलेआम धज्जियां बनाई जाती है। इसके बावजूद जिला प्रशासन इस मामले में ध्यान नहीं दे पा रहे हैं । इस मामले में क्रेशर खदानों की जांच की जाए तो कई अन लीगल क्रेशर खदानों की पोल खुल कर सामने आ जायेगी। इस मामले में सूत्रों के माने तो जब जब क्रेशर खदानों में कोई घटना दुर्घटना सामने आती है तब वहां की जांच की जाती है । तब जाकर वहाँ की लापरवाहियां सामने आती है और तब जाकर क्रेशर खदान के खिलाफ कार्यवाई की गाज गिराई जाती है । ऐसे में जिला प्रशासन के माइनिंग विभाग भी शक के दायरे में आ जाते हैं । जो कार्यवही के नाम पर अपने ही राग अलापते नजर आते है। इस लिहाज से देखे तो लगता है । कि टीमरलगा क्षेत्र के खदानों की नियमित जांच के नाम पर महज खाना पूर्ति ही की जाती है। जहां ना मापदंडों का आता पता होता है और न ही कोई नियम कानून नजर आते हैं।
कौन तय करेगा जिम्मेदारी

इस मामले में खास बात यह है कि ट्रिमर लगा के तमाम क्रेशर खदानों के प्रदूषण से लेकर डंपिंग करने तक की सारी प्रक्रिया की अनुमति पर्यावरण विभाग तय करती है ।इस हिसाब से टीमरलगा क्षेत्र के क्रेशर खदानों में जो भी अनियमिताएं हो रही है ।उसकी सारी जिम्मेदारी कहे या मॉनिटरी पर्यावरण विभाग को ही करना होता है ।जो इस मामले में अब तक कोई कार्यवाही करते नजर नही आ रही है । जबकि उक्त क्षेत्र में ऐसा कोई जगह नहीं बचा है जहां फ्लाइ ऐस की डंपिंग नहीं हुई होगी।