भाठागाँव रायपुर में बही हास्य रस की बयार, पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे की कविता से गूंजते रहे ठहाके

स्व.अमरनाथ पटेल की स्मृति में आयोजित, यूनिहोम्स ,भाठागाँव रायपुर में हुआ 23 दिसंबर को संम्पन्न
लक्ष्मी नारायण लहरे की रिपोर्टिंग
ब्रह्मोस न्यूज रायपुर । यूनिहोम्स , महादेव घाट रोड, भाठागाँव रायपुर में 23 दिसंबर को स्व.अमरनाथ पटेल की स्मृति में उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप देश के लब्धप्रतिष्ठ हास्य कवि पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे के मुख्य आतिथ्य तथा प्रसिद्ध कवि एवं ग़ज़लकार डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ के विशिष्ट आतिथ्य में अमर हास्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

माँ सरस्वती के पूजन एवं स्व.अमरनाथ पटेल की तस्वीर पर माल्यार्पण के पश्चात श्रीमती सुनीता पटेल द्वारा अतिथियों का श्रीफल, शाल एवं मोमेंटो सू सम्मान किया गया। देश के लब्धप्रतिष्ठ हास्य कवि पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे ने अपनी सास बहू प्रकरण ,कुकुर पुराण, बढ़ा के बताना हे, मल्लिका शेरावत – रामदेव प्रसंग ,टाईम नहीं है। साँस लेना है। दुबई यात्रा एवं एयरहोस्टेस जैसी कविताओं से श्रोताओं को ख़ूब हँसाया। पूरा वातावरण ठहाकों से गूँजता रहा। डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने ‘घाव पुराना भरा नहीं है। भीतर का भय मरा नहीं है’ एवं ‘जिसमें ढालोगो मैं उसमें ढल जाऊँगा ,नेह दोगे मुझे मैं पिघल जाऊँगा।’ जैसे गीतों और ग़ज़लों से माहौल को रसमय बना दिया । देर रात तक यूनिहोम्स में बही कविता की बयार। कार्यक्रम का संचालन प्रियंका पटेल एवं आभार प्रदर्शन राहुल पटेल ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी एवं आसपास के लोग इकट्ठे होकर कविताओं का भरपूर आंद उठाया।


