छुक छुक ट्रेन की कमी ने छीन ली कमला नेहरू उद्यान की रौनकता

वहां ना तो छुक छुक ट्रेन की आवाज से बच्चों की किलकारियां गूंज रही है और न, हीं गार्डन में बने झरने व फव्वारों की कल कल बहते पानी की खूबसूरती है
ब्रह्मोस न्यूज रायगढ़। सर्दी हो गर्मी हो या फिर बरसात या फिर हो ठंड का मौसम गार्डन की सुंदरता वहां की रौनकता से झलकती है। परंतु देख-देख के अभाव में इन दोनों कमला नेहरू उद्यान की हालत बदहाल होती जा रही है। वहां ना तो छुक छुक ट्रेन की आवाज से बच्चों की किलकारियां गूंज रही है और न, हीं गार्डन में बने झरने व फव्वारों की कल कल बहते पानी की खूबसूरती । युवाओं और महिलाओं को अपनी और आकर्षित नहीं कर पा रहे है।

दरअसल पिछले कुछ महीनो से कमला नेहरू उद्यान में ना तो बच्चों की ट्रेन चल रही है और न, ही फव्वारा में पानी की रौनकता दिखाई दे रही है यहां तक गार्डन बनाए गए खूबसूरती का प्रतीक आर्टिफिशियल झरना भी जैसे सूख गया है जो गार्डन में आने वाले लोगों को हर्षित ही नहीं कर पा रहे हैं यू लगता है कि गार्डन में जैसे उदासी छा गई है जबकि कमला नेहरू उद्यान का देखरेख वह रखरखाव जिंदल स्टील के द्वारा किया जाता है इसके बावजूद कमला नेहरू उद्यान में उदासी सिंचाई हुई है। यू कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि शहर के हृदय स्थल में बने खूबसूरती की मिसाल कमला नेहरू गार्डन की स्थिति आजकल बढ़ाहल सी नजर आ रही है। इसका क्या कारण है यह या तो नगर निगम बता सकते है या फिर जिंदल के अधिकारी।
मौसम की मोहताज नही कमला नेहरू गार्डन

वैसे तो कमला नेहरू उद्यान किसी मौसम का मोहताज नहीं है। जहां बच्चों की छुक छुक ड्रैगन ट्रेन और गार्डन के फव्वारे से युवाओं बच्चों का महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ती थी। आज वह सब चुप चुप से नजर आ रहे है जो कमला नेहरू उद्यान रौनकता जैसे छीन ली है और वहां उदासी सी छाई हुई है।
फीकी-फीकी सी हो गई है गार्डन की रौनकता

इस मामले में सूत्रों के माने तो गार्डन के छुक छुक ट्रेन को कोरोना कल के दौरान अज्ञात चोरों ने पार कर दी परंतु इसको पुख्ता तौर पर कहा नही जा सकता कि बच्चों की ट्रेन को किसी चोर ने पार कर दी हो। बताया अभी जाता है कि गार्डन के दो एसी डीसी बैटरी तक को चोरों ने पर कर दी। फिलहाल इस मामले में कितना सच और कितना झूठ है। यह या तो गार्डन के संचालक बता सकते हैं या फिर गार्डन के कर्मचारी ।परंतु बच्चों के छुक छुक ट्रेन और गार्डन के झरना और फव्वारों के बिना वहां रौनकता फीकी फीकी सी नजर आ रही है।
